20 केंद्रों पर 2000 में से 1552 ने दी पीटीआइ भर्ती की परीक्षा

Haryana Karnal

hindustan1st news,करनाल : प्रदेश सरकार द्वारा शनिवार और रविवार बंद की घोषणा के बीच जिले के 20 परीक्षा केंद्रों पर पीटीआइ की लिखित परीक्षा ली गई। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से रविवार को पांच जिलों में पीटीआइ की लिखित परीक्षा आयोजित करवाई गई। करनाल में 20 केंद्रों पर दो हजार में से 1550 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा के दौरान कोविड-19 के चलते संक्रमण बचाव का विशेष ध्यान रखा गया। प्रत्येक अभ्यर्थी व ड्यूटी कर्मचारी की केंद्र पर पहुंचते ही थर्मल स्क्रिनिग की गई। एक केंद्र पर अधिकतम 100 परीक्षार्थी बैठाए गए। परीक्षा के मद्देनजर धारा-144 को लागू की गई।

परीक्षा नकल रहित संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। प्रशासन की ओर से परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए रोडवेज को विशेष बस सुविधा के लिए निर्देश दिए और 15 बसें रिजर्व रखी गई। परीक्षा केंद्र पर सुबह 11 बजे परीक्षार्थी पहुंचना शुरू हो गए थे। पुलिस पहरे के बीच ड्यूटी पर तैनात सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के आईडी कार्ड अनिवार्य किया गया। नोडल अधिकारी परीक्षा एवं सीटीएम विजया मलिक ने बताया कि जिले के 20 परीक्षा केंद्रों में 2000 परिक्षार्थियों के बैठने का बंदोबस्त किया गया था, जिनमें 1552 ने परीक्षा दी। किसी भी केंद्र में गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली है। कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे इंतजाम किए गए थे। परीक्षा को नकल रहित व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाया गया है। कानून व ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया। इसके अलावा फ्लाइंग स्कवायड से हर परीक्षा केंद्र पर कड़ी नजर रखी गई।

बर्खास्त पीटीआइ ने परीक्षा का बहिष्कार किया

वहीं धरनास्थल पर बर्खास्त पीटीआइ ने दावा किया कि बर्खास्त पीटीआइ ने परीक्षा का बहिष्कार किया हुआ है और रणनीति के तहत सभी जिलों से प्रदर्शनकारी पलवल और गुरुग्राम में इक्ट्ठा हुए हैं। सरकार से नाराज बर्खास्त पीटीआइ ने 70वें दिन प्रदर्शन करके नारेबाजी की और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से लिखित परीक्षा का अनुपस्थित रह कर विरोध किया। आरोप है कि सरकार खुद ही बंद का पालन नहीं कर रही और कोरोना के बीच परीक्षा ली जा रही है। प्रदेश सरकार के अड़ियल रवैये के कारण परिक्षार्थियों से संक्रमण के बीच परीक्षा दिलवाई जा रही है। दूसरी तरफ, परीक्षा केंद्र के बाहर परिक्षार्थियों ने कम समय और कठिन सवालों पर रोष व्यक्त किया।

लघु सचिवालय के सामने डटे रहे प्रदर्शनकारी

बर्खास्त पीटीआइ का धरना रविवार को 70वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों की संख्या बेशक कम थी, लेकिन लिखित परीक्षा का बहिष्कार कर क्रमिक अनशन को जारी रखा गया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। सर्वकर्मचारी संघ के सदस्यों ने समर्थन देते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरनास्थल पर संजीव कुमार, कुलदीप सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार अपने ही फैसलों के कारण कटघरे में खड़ी हो रही है। कोविड-19 के चलते शनिवार-रविवार को बाजार व कार्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं, दूसरी ओर पीटीआइ भर्ती की परीक्षा भी ली जा रही है। हरियाणा शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संदीप बलड़ी, सुशील हथलाना ने कहा कि प्रदेश सरकार के गलत फैसलों के कारण पीटीआइ आज सड़कों पर है और कोरोना महामारी के बीच खाली पेट परीक्षा दे रहा है।

सुशासन का कोरा झूठ बोल रहे सत्ताधरी : सुनीता

धरने पर बर्खास्त पीटीआइ सुनीता ने बताया कि लोगों की सुविधाओं का दावा करने वाली सरकार अभी तक बर्खास्त पीटीआइ की नियुक्ति का फैसला नहीं ले पा रही है। राजनीति से ऊपर उठकर जनता की सेवा का बखान करने वाले मुख्यमंत्री अभी तक प्रदेश के 1983 पीटीआइ की नियुक्ति का रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं। इधर परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में मुश्किल आ रही है। परिवार में निधन के बावजूद नौकरी बचाने के लिए धरने पर बैठी हूं। सभी पीटीआइ दो माह से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं और सत्ताधारी केवल सुशासन के कोरे झूठ का बखान कर रहे हैं।

घर चलाना मुश्किल, परीक्षा कहां सें दें : कुलदीप

कुलदीप सिंह ने बताया कि दस साल नौकरी करने के बाद बहाली के लिए सरकार द्वारा परीक्षा लेना जैसे बर्खास्त पीटीआइ के साथ मजाक किया जा रहा है। स्कूलों में पीटीआइ ने कई खिलाड़ियों को तैयार किया है, इससे बड़ी परीक्षा भला क्या हो सकती है। पिछली सरकारों ने अपने कार्यकाल में दस साल वाले कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर दिया था, जबकि सत्ताधारियों को बर्खास्त पीटीआइ के परिवारों की कोई चिता नहीं है। वहीं परीक्षा केंद्र के बाहर अभ्यार्थी कर्मचंद, सतीश, प्रवीण, विकास ने बताया कि सरकार की ओर से परीक्षा लेकर उनके साथ छल किया है। पेपर को काफी हद तक मुश्किल बनाया है और समय भी कम दिया गया।

बीमारी में सरकार ने मरने को छोड़ा : ईश्वर सिंह

परीक्षा का बहिष्कार करने वाले ईश्वर सिंह ने बताया कि पीटीआइ नियुक्ति से पहले दो विभागों में नौकरी कर चुके थे, लेकिन बेहतर भविष्य और सेवाभाव को लेकर पीटीआइ में नियुक्ति ली। अब दस साल बाद सरकार द्वारा स्थाई फैसला न लेने के कारण सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। परिवार की जिम्मेदारी सहित अपने इलाज करवाने के लिए पैसों के लाले पड़े हुए हैं। बैंक से लोन की किश्ते नहीं भरी जा रही हैं और सुशासन का प्रचार करने वाले सत्ताधारी दो माह से अधिक समय से पीटीआइ की नियुक्ति का रास्ता नहीं निकाल पा रही है।

आस्ट्रेलिया छोड़कर नियुक्ति ली थी : संजीव

संजीव कुमार ने बताया कि राजनीति से ऊपर उठकर विकास की बातें करने वाली सरकार के कार्यकाल में बर्खास्त पीटीआइ से परीक्षा दिलवाना केवल मात्र राजनीतिक खेल है। पीटीआइ का चयन होने की सूचना में आस्ट्रेलिया में पढ़ाई छोड़ कर घर पहुंचे थे ताकि देश के बच्चों का भविष्य संवारने में अपनी भागीदारी निभा सकें। अब सरकार हमें सड़कों पर बैठा कर परीक्षा लेने में लगी है। उन्होंने बताया कि लिखित परीक्षा का बहिष्कार किया गया है।

ये है पीटीआइ शिक्षकों का मामला

वर्ष-2010 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में 1983 पीटीआइ शिक्षक भर्ती किए गए थे। भर्ती के बाद कुछ लोगों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया था कि सैकड़ों चयनित उम्मीदवारों का शैक्षिक रिकॉर्ड बेहद खराब है। आरोप लगा था कि इंटरव्यू के लिए तय 25 अंक को बदलकर 30 कर दिया गया। इन सबके मद्देनजर हाईकोर्ट ने पीटीआइ भर्ती को रद कर दिया था। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सही बताया था। अब मनोहर सरकार ने उन्हीं पीटीआइ को मौका दिया है कि वे लिखित परीक्षा पास करके दोबारा नौकरी में आ सकते हैं। दो माह से धरना प्रदर्शन कर रहे बर्खास्त पीटीआइ ने लिखित परीक्षा का विरोध कर रहे हैं।