अंबाला: कोरोना को हराने के बाद भी जिंदगी की जंग हार गये कथावाचक

Ambala

hindustan1st news, अंबाला : कथावाचक एवं भृगु ज्योतिष अनुसंधान संस्थान के कोषाध्यक्ष 45 वर्षीय पंडित कमल वशिष्ठ की यमुनानगर के गाबा अस्पताल में मौत हो गई। 4 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ होने के चलते उन्हें कैंट सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें कोरोना पॉजिटिव बताकर मिशन अस्पताल कोविड यूनिट में भर्ती किया गया। ऑक्सीजन सेचुरेशन कंट्रोल न होने के कारण उन्हें एमएम कोविड यूनिट ले जाया गया। वहां भी स्थिति कंट्रोल न होने के चलते 8 सितम्बर को परिजन गाबा अस्पताल ले गए थे। पिछले 17 दिन में उनका 9 बार डायलिसिस हुआ। 20 सितम्बर को कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई। लेकिन फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वीरवार को मौत हो गई।

कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के 2-3 दिन बाद ही फेफड़ों में संक्रमण होने से मरीज की मौत का तीन दिन में यह दूसरा मामला है। प्रसिद्ध बिजनेसमैन 75 वर्षीय वाईपी दास की भी इन्हीं हालात में 22 सितंबर को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में मौत हो गई थी। 5 सितंबर को कैंट में कराए टेस्ट में कोविड पॉजिटिव मिले थे। 7 सितंबर को मैक्स अस्पताल गए। 20 सितम्बर को उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई, लेकिन 22 सितंबर को फेफड़ों में संक्रमण के चलते मौत हो गई।

इससे पहले सेक्टर-7 के रहने वाले कपड़ा व्यवसायी करीब 60 वर्षीय जोगेंद्र बजाज की 28 जुलाई को पीजीआई में मौत हो गई थी। जोगिंद्र बजाज कोरोना को हराने में सफल रहे थे लेकिन फेफड़ों की बीमारी व निमोनिया के चलते उनकी मौत हो गई। जोगेंद्र बजाज के पारिवारिक मित्र एडवोकेट संदीप सचदेवा के मुताबिक बजाज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। गाबा अस्पताल के संचालक डाॅ. बीएस गाबा के मुताबिक ऐसे कई केस आ चुके हैं कि कोरोना ठीक होने के बाद मरीज की मौत हो गई। कोरोना फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद फेफड़े सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते जैसा कोरोना होने से पहले किया करते थे। मरीज के ठीक होने से दूसरे या चौथे हफ्ते में डेथ हो रही है। पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस यानि फेफड़ों में बन रहे रेशों का बढ़ता ग्राफ कोरोना निगेटिव आने के बाद भी जानलेवा बन रहा है।

ठीक होने के बाद दो सप्ताह सावधानी बरतें
सिटी के सिविल अस्पताल के फिजिशियन डॉ. हर्ष कुशवाह के मुताबिक उनके पास भी ऐसे केस आ रहे हैं। पेशेंट ठीक हो जाने के बाद भी फेफड़े नार्मल नहीं हो पाते हैं। वायरस फेफड़ों को डैमेज कर देता है। क्रॉनिक लंग्स डिजीज हो जाता है। डिस्चार्ज होने के बाद कई युवा भी आ रहे हैं। वायरस लोड कितना है इस पर भी डिपेंड करता है। जिन लोगों को दोबारा इंफेक्शन होता है तब वह ज्यादा घातक होता है। कोरोना से उभरने के बाद मरीज दो-तीन सप्ताह सावधानी बरतें।

होम आइसोलेशन के मरीजों से संपर्क साधने के लिए बनाई 11 टीमें
होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए 11 टीमों का गठन किया है। डिस्ट्रिक्ट क्वारेंटाइन कमेटी के इंचार्ज डॉ. राजेंद्र राय के मुताबिक अभी होम आइसोलेशन में 997 मरीज हैं। ये टीमें हर दूसरे दिन इन मरीजों से संपर्क करेंगी। रोजाना 50 से 60 घरों का विजिट होगा। सिटी व कैंट में 3-3, नारायणगढ़, बराड़ा, सीएचसी चौड मस्तपुर, मुलाना व शहजादपुर में एक-एक टीम रहेगी।