अन्नदाता की समस्या ही असली मुद्दा है साहेब

Editorial

hindustan1st news: देश मे बढ़ती बेरोजगारी के साथ-साथ किसानों की समस्याएं भी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। देश का अन्नदाता जिसकी कठिन मेहनत और तपस्या से तैयार अन्न हमारी थाली तक पहुंचता है। वो अन्नदाता शुरू से ही आर्थिक समस्याओं से घिरा रहता है। हम सब गरीब व मध्यमवर्गीय किसानों की आत्महत्याओं के बारे मे देखते सुनते रहते हैं। लेकिन स्थिति गंभीर है ये आंकड़े स्थिति की भयानकता को दर्शाता है।

2004-14 के बीच 1,74,000 किसानों ने आत्महत्या की थी?

गृह मंत्रालय के उन आंकड़ों के मुताबिक जो लोकसभा के पटल पर पिछले साल रखे गए, 2016 में भारत में 6,351 किसानों/ खेती करने वालों ने खुदकुशी की है. यानी हर रोज 17 किसानों ने खुदकुशी की है। यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2015 में यह आंकड़ा 8,007 यानी हर दिन 22 किसान आत्महत्या कर रहे थे। यानी खुदकुशी के आंकड़ों में 21 फीसदी की गिरावट है. वर्ष 2015 तक किसानों की खुदकुशी की रिपोर्ट अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो उसके वेबसाइट पर मौजूद है लेकिन 2016 से लेकर 2019 तक की कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है।

लेकिन शायद कभी यह जानने की कोशिश नही करते कि आखिर आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न क्यों होती हैं। आखिर इसका समाधान क्या है। सरकार क्यों नही इस किसान वर्ग की समस्याओं को सुलझाने के प्रति गंभीर दिखाई नही देती।