कुछ दाग अच्छे है ?

Editorial

मजबूरी में नही स्वेच्छा से होता है यहाँ लॉकडाउन

hindustan1st news, मैंने अक्सर देखा है लोग मन्नतें मांगने के लिए व्रत करते हैं और नियमत नियमों का पालन करते हैं और यह सिलसिला कम से लंबे समय तक चलता है। लेकिन व्रत से कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी जुड़े हुए हैं। जो सभी को पता है लेकिन जब किसी ने मुझसे पूछा कि आप मंगलवार का व्रत क्यों करते हैं। तो मेरा जवाब था की केवल उस प्रभु को धन्यवाद देने के लिए कि उसने यह जीवन प्रदान किया और शारीरिक बैलेंस बनाने के लिए तभी मेरे ध्यान में लॉकडाउन को लेकर एक घटना ध्यान में आई।

कोरोना वायरस (Coronavirus Outbreak) से लड़ने के लिए कई देशों में लॉकडाउन (Lockdown) हो गया है। लोग अपने घरों में कैद हैं। इससे कुछ तकलीफें हैं, तो उससे अधिक सुकून भी मिल रहा है। तो क्या सबकुछ सामान्य होने के बाद भी हम कभी एक-दो दिन के लिए सबकुछ बंद करने का कोई सिस्टम बना सकते हैं? इंडोनेशिया के सबसे शानदार और कल्चरल शहरों शामिल बाली में ऐसा ही कुछ होता है। इसकी वर्षों पुरानी रवायत है। जब पूरा बाली सन्‍नाटे का साम्राज्‍य बुनता है। न कोई खाता है न पकाता है और न बोलता है। न गाड़ियां चलती हैं और न` हवाई जहाज। पूरा शहर ठहर जाता है। न्‍यपी (Nyepi) नामक यह मौन पर्व बाली (Bali island) के लोगों के जीवन को कैसे नई ऊर्जा और रफ्तार देता है।

अनोखा पर्व

मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया में बाली द्वीप पर 83 फीसदी हिंदू बसते हैं, जबकि पूरे देश में हिंदू आबादी सिर्फ 1।7% है। नववर्ष शुरू होने पर बाली का हिंदू समुदाय न्‍यपी का अजब पर्व मनाता है। उस दिन पूरे 24 घंटे के लिए हर कोई चुप्‍पी का संसार अपने गिर्द बुनता है। पूरे बाली में जैसे हर शय ठहर जाती है। कोई कुछ नहीं बोलता, सिर्फ ध्‍यान गुनता है। न रसोई में कुछ पकता है न कारखाने ही चलते हैं। उपवास रखा जाता है। सड़कों पर आवाजाही बंद हो जाती है। रफ्तार ठहर जाती है। घरों से लेकर होटलों तक में बत्तियां नहीं जलतीं। और तो और पूरे 24 घंटे के लिए डेनपसार हवाई अड्डा पर भी चुप्‍पी पसर जाती है। हां, इमरजेंसी सेवाएं जारी रहती हैं, जरूरत हो तो आप अपने घरों के भीतर बत्‍ती जला सकते हैं, बस शर्त इतनी होती है कि रोशनी बाहर न झांके। लोग दिन भर मौन रखते हैं। आग और रोशनी कतई नहीं होती। घरों में खाना नहीं पकाया जाता। कोई यात्रा और मनोरंजन नहीं भी नहीं होता। यही नहीं शहर में बसने वाले दूसरी आस्‍थाओं जैसे मुस्लिम और इसाई धर्म के लोग अपने हिंदू हमवतनों की इस परंपरा का पूरा सम्‍मान करते हैं। इसलिए मैं हमेशा से बाली के सफर पर जाना चाहती हूं वो भी न्‍यपी के मौके पर।

आत्म-मंथन का दिन

कौशिक कहती हैं कि यह निराला पर्व हमारे आत्मावलोकन का दिन होता है। जब लोगों को जिंदगी की भागदौड़ से कुछ वक्त का विश्राम मिलता है। वाणी को आराम मिलता है। प्रकृति को सुकून मिलता है। यह पर्व दरअसल, शुद्धता को धारण करने का अवसर लेकर आता है। लोगों का मानना है कि न्यपी समूचे संसार और आत्मा की शुद्धिकरण का पर्व है। मस्तिष्‍क, वाणी, पेट को डिटॉक्‍स करने का दिन। यह थम जाना दरअसल थम जाना नहीं बल्कि को आगे के जीवन को ऊर्जावान बनाए रखने और उसे रफ्तार व दिशा देने का अवसर होता है।और तो और पूरे 24 घंटे के लिए डेनपसार हवाई अड्डा पर भी चुप्‍पी पसर जाती है। हां, इमरजेंसी सेवाएं जारी रहती हैं, जरूरत हो तो आप अपने घरों के भीतर बत्‍ती जला सकते हैं, बस शर्त इतनी होती है कि रोशनी बाहर न झांके। लोग दिन भर मौन रखते हैं। आग और रोशनी कतई नहीं होती। घरों में खाना नहीं पकाया जाता। कोई यात्रा और मनोरंजन नहीं भी नहीं होता। यही नहीं शहर में बसने वाले दूसरी आस्‍थाओं जैसे मुस्लिम और इसाई धर्म के लोग अपने हिंदू हम वतनों की इस परंपरा का पूरा सम्‍मान करते हैं।

पालन करवाने के लिए कम्युनिटी पुलिस

कौशिक कहती हैं कि चुप्‍पी के इस पर्व का पालन करवाने के लिए कम्‍युनिटी पुलिस (Pacalang) मुस्‍तैद रहती है। ताकि समुद्रतटों से लेकर सड़कों तक पर शांति बनी रहे। हम न्‍यपी का एक वर्जन हिंदुस्तान में भी मना सकते हैं। जिसमें 24 घंटे के लिए सबकुछ बंद रखकर प्रकृति को उसका दिया हुआ लौटाएं। इससे हम संक्रमण वाली बीमारियों से बच सकते हैं। इससे जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा।

सोचिए कि हम जब मजबूरी में इतने बड़े लोग डाउन का पालन कर सकते हैं। तो क्या स्वयं देश और प्रकृति के लिए महीने में होने वाली छुट्टियों को स्वयं लॉक डाउन में बदलकर न केवल देश प्रकृति बल्कि स्वयं का भी भला कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और स्वस्थ संसार देने की कल्पना कर सकते हैं। जो आज की स्थिति में तमाम प्रयासों के बाद भी असफल नजर आता है। ऐसा ना हो कि हम विकास की अंधी दौड़ में लगे रहे और फिर कुछ सालों बाद प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग को लेकर आप आ स्थिति पैदा हो। और फिर मजबूरी में हमें लॉक डाउन करना पड़े इसलिए बेहतरी इसी में है कि समय से पहले जाकर इसके उपाय करें। लोक डाउन कितना कारगर उपाय है यह इन दिनों पता लग ही रहा है। क्योंकि कहा गया है pricosion is better than cure.