GJU में सरकारी ख़जाने को चूना लगाने के मामले में मामला दर्ज कर जांच की शिकायत

Hissar

हिसार : गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार के हरियाणा स्कूल ऑफ़ बिज़नस में वर्ष 2013 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हिमानी शर्मा ने अपनी चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा में की गई छह वर्ष की नौकरी दिखाकर नियुक्ति ली थी और इन दोनों यूनिवर्सिटीज के कर्मचारियों/अधिकारीयों की मिलीभगत से अपनी पूर्व की छह वर्ष की नौकरी की गणना करवाकर गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार में ज्यादा सैलरी लेना शुरू कर दिया, जबकि हिमानी शर्मा की चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा में की गई छह वर्ष की नौकरी की गणना ज्यादा सैलरी देने के लिए किसी भी हालत में नहीं की जा सकती थी क्योंकि हिमानी शर्मा ने चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा में नौकरी नियमानुसार न लेकर गैर क़ानूनी तरीके से हासिल की थी जबकि हरियाणा सरकार वा यूजीसी के इस बारे दिए स्पष्ट नियमों के अनुसार किसी असिस्टेंट प्रोफेसर की पूर्व की नौकरी की ज्यादा सैलरी के लिए गणना तभी की जा सकती थी जबकि उसने अपनी पूर्व की नौकरी में नियुक्ति नियमानुसार प्राप्त की हो।

जब गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार के अधिकारी ने चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा से इस बारे पुछा कि क्या हिमानी शर्मा ने उनकी यूनिवर्सिटी में नियमानुसार नौकरी प्राप्त की थी तो उन्होंने इसकी जानकरी देने की बजाए झूठा व गोल-मोल जवाब दे दिया, जिस पर ऐतराज उठाने वा मांगी गई जानकारी लेने की बजाए गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार के अधिकारियों ने खुद से लिख दिया कि हिमानी शर्मा की पूर्व नौकरी में हुई नियुक्ति में यूजीसी के निर्धारित नियमों का पालन हुआ था और कार्यकारी परिषद् ने उपलब्ध रिकॉर्ड को देखे बगैर ही हिमानी शर्मा को उसकी पूर्व की नौकरी का लाभ देकर ज्यादा सैलरी का पात्र बनाकर सरकारी ख़जाने को करोड़ों रूपए का चूना लगने का रास्ता खोल दिया।

इसके उपरांत वर्ष 2020 में हिमानी शर्मा को उसकी चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा में की पूर्व की नौकरी का लाभ देकर एसोसिएट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार के अधिकारियों ने कार्यकारी परिषद् में रखा, जिसपर हिसार के श्री अनिल पान्निकर ने मामले का भांडाफोड़ करके दस्तावेजों सहित सारे मामले को यूनिवर्सिटी के अधिकारीयों व कार्यकारी परिषद् की जानकारी में ला दिया, लेकिन कार्यकारी परिषद् ने यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड देखकर हिमानी शर्मा व यूनिवर्सिटी के दोषी अधिकारीयों/कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज करवाकर हिमानी की दी गई ज्यादा सैलरी की ब्याज सहित वसूली की कार्यवाही करने व उसे बर्खास्त करने की बजाय मिलीभगत से उसे एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन दे डाली और उपकुलपति टन्केश्वर कुमार सचदेवा को तीन लोगों की आंतरिक समिति बनाकर अपने स्तर पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया, जबकि मामले में भ्रष्टाचार के कागजी सबूत सामने आने पर और यूनिवर्सिटी में उपलब्ध रिकॉर्ड की अनदेखी करके हिमानी शर्मा को प्रमोट नहीं किया जा सकता था और ऐसा करके कार्यकारी परिषद् ने हिमानी शर्मा को उसकी पूर्व की नौकरी का लाभ देकर ज्यादा सैलरी का पात्र बनाकर सरकारी ख़जाने को करोड़ों रूपए का चूना लगने का रास्ता खोल दिया।

आज इस बात को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद हिमानी शर्मा लगातार ज्यादा सैलरी लेकर सरकारी ख़जाने को लाखों रुपए का चूना लगा चुकी है और भविष्य में इसके न रुकने पर ये करोड़ों रूपए में पहुँच जायेगा, इस पर जगाधरी निवासी डॉ. संभव गर्ग ने आज थाना शहर हिसार में सबूतों सहित दोषीगण के विरुद्ध मामला दर्ज करने की शिकायत दी है। इससे पूर्व डॉ. संभव गर्ग ने हिमानी शर्मा को चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा में गैर क़ानूनी नियुक्ति देने के सन्दर्भ में उसके व चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा के अधिकारीयों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा भी दर्ज करवा रखा है, जिसकी जाँच श्री आर्यन चौधरी, उपपुलिस अधीक्षक (मुख्यालय), सिरसा कर रहे है।