नक्शे और रजिस्ट्री के लिए वार्ड नंबर-3 के बाशिंदे शहर नगर निगम और छावनी के फेर में फसें

Ambala

अम्बाला : नगर निगम चुनाव के बाद अब वार्ड नंबर-3 के बाशिंदे शहर नगर निगम और छावनी के फेर में फंस गए हैं। आधे वार्ड की करीब पांच हजार से ज्यादा जनता को इसके चलते अपने कार्यों के लिए न केवल छावनी और शहर के धक्के खाने पड़ रहे हैं, बल्कि मानसिक और आर्थिक परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है। एक ही काम के लिए उन्हें दो अलग-अलग जगह धक्के खने पड़ रहे हैं। प्लॉट, मकान या फिर दुकान की एनओसी लेनी है तो इन लोगों को शहर नगर निगम का रुख करना पड़ता है, लेकिन इन्हीं की यदि रजिस्ट्री करवानी है तो इन लोगों को शहर से 10 किलोमीटर दूर स्थित छावनी तहसील जाना पड़ रहा है। आने-जाने की बात करें तो करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर यह लोग करने को मजबूर हैं।

इन एरिया के लोग फंसे हैं ट्विन सिटी के फेर में…

  • मंडौर
  • जग्गी गार्डन
  • आसा सिंह गार्डन
  • सुंदर नगर
  • टैगोर गार्डन
  • नई आबादी

इन कार्यों के लिए पहले शहर फिर जाना पड़ता है छावनी
दरअसल आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और रिहायशी प्रमाण पत्र यह तीन ऐसे जरूरी दस्तावेज हैं, जोकि हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरतें हैं। इनके लिए गांव मंडौर, जग्गी गार्डन, सुंदर नगर, नई आबादी और आसा सिंह गार्डन वासियों को पहले एमसी से दस्तावेज वेरिफाई करवाने के बाद नगर निगम में जाना पड़ता है। नगर निगम से दस्तावेज वेरिफाई होने के बाद आखिरी अथॉरिटी पटवारी और तहसीलदार होते हैं। इसीलिए इन पर अंतिम मुहर लगवाने के लिए यहां के लोगों को छावनी तहसील जाना पड़ता है, जोकि नगर निगम से 10 किलोमीटर दूर है। इसी तरह नक्शे पास करवाने और मकान, दुकान और प्लाट की एनओसी के लिए इन्हें नगर निगम में जाना पड़ता है, जबकि रजिस्ट्री के लिए छावनी।

दरअसल 2007-08 में जब परिसीमन की अंतिम नोटिफिकेशन बनाया गया तो इन एरिया को छावनी विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया गया था, लेकिन इसके बाद वर्ष 2010 में नगर निगम का गठन कर दिया गया था। अंबाला छावनी और शहर दोनों को मिलाकर संयुक्त रूप से नगर निगम बनाया गया। इसीलिए लोगों को ज्यादा दिक्कतें नहीं आती थीं, क्योंकि वह अपने काम शहर व छावनी किसी भी नगर निगम कार्यालय से करवा सकते थे, लेकिन 2019 में 26 जुलाई को शहर एरिया में 12 गांव शामिल करने के बाद इसे छावनी सदर से अलग कर नगर निगम बनाया गया, जबकि छावनी सदर को परिषद में तब्दील कर दिया गया। करीब छह महीने पहले शहर नगर निगम की वार्डबंदी हुई तो किसी ने इस पर आपत्ति जाहिर नहीं की, लेकिन अब चुनाव के बाद जब लोग अपने काम के लिए नगर निगम पहुंच रहे हैं तब उन्हें पता चलता है कि शेष कार्यों के लिए तो छावनी का सफर तय करना होगा।

अब क्या है बदलाव की उम्मीदें और कानूनी पेंच
2007-08 में जब परिसीमन आयोग की नोटिफिकेशन आई तो अंबाला शहर कानूनगो सर्कल का पंजोखरा और मंडौर पटवार सर्कल को अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया गया था। भारत के संविधान 84 में संशोधन के फलस्वरूप अब देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का अगला परिसीमन 2031 के बाद होगा। अब इन क्षेत्रों को शहर विधानसभा क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा सकता। जब वार्डबंदी की गई और आपत्तियां मांगी गई तब यदि कोई आपत्ति जता देता और इन एरिया को निगम से अलग कर दिया जाता तो कुछ हो सकता था, लेकिन अब अगली वार्डबंदी तक का इंतजार करना होगा।