आयकर विभाग का दावा : कांग्रेस MLA निलय डागा की 450 करोड़ की अघोषित संपत्ति हुई बरामद

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नई दिल्ली : मध्य प्रदेश में बैतूल से कांग्रेस विधायक निलय डागा के घर और बिजनेस से जुड़ी जगहों पर छापेमारी में 450 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित संपत्ति बरामद हुई है। ये छापेमारी आयकर विभाग ने की थी। आयकर विभाग ने सोमवार की शाम इस बात की जानकारी दी। आयकर विभाग ने ये छापेमारी 18 फरवरी से शुरू की थी। विभाग ने मध्य प्रदेश के बैतूल और सतना जिलों के 22 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की, जो विधायक से जुड़े थे। इसके अलावा मुंबई और कोलकाता में भी कांग्रेस विधायक निलय डागा से जुड़े व्यवसायिक परिसरों पर भी छापे मारे गए थे। छापेमारी में 8 करोड़ रुपये कैश में नकद मिले थे। जिसमें 44 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा थी। इसके साथ ही नौ बैंक लॉकर के बारे में जानकारी मिली।

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस विधायक निलय डागा और उनके परिवार ने 259 करोड़ रुपये सिर्फ अलग-अलग कंपनियों के शेयर में निवेश दिखाए थे। निलय डागा की अघोषित संपत्ति में बड़ी राशि शेल कंपनियों में निवेश के जरिए हासिल की गई है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मुताबिक, विधायक के एमपी के बैतूल में स्थित सोया प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप, महाराष्ट्र के सोलापुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक साथ कार्रवाई की गई थी। जिसमें 8 करोड़ रुपये कैश में बरामद किए गए थे और कंपनी के पास इसकी कोई जानकारी नहीं थी। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन में मिले मैसेज से 15 करोड़ रुपये की नकद भुगतान और गलत तरीके से लेनदेन की बात भी सामने आई है।

सीबीडीटी ने अपने बयान में कहा, विधायक की कोई भी कंपनी दिए गए पते पर चालू नहीं पाई गई। हमने दी गई किसी भी कागजी कंपनियों या इसके किसी भी निदेशक की पहचान की पुष्टी नहीं कर पाए हैं। कई कागजी कंपनियों को आयकर विभाग ने बंद पाया है। कंपनी ने गलत दावा किया था। समूह ने कोलकाता स्थित शेल कंपनियों से भारी प्रीमियम पर शेयर पूंजी के माध्यम से 259 करोड़ की अघोषित आय की शुरुआत की थी। इसके अलावा कोलकाता की शेल कंपनियों के एक और सेट में शेल कंपनियों में पेपर निवेश की बिक्री के माध्यम से 90 करोड़ की अघोषित आय के बारे में पता चला।

सीबीडीटी ने कहा कि समूह ने गलत दावा किया कि समूह इकाई के शेयरों की बिक्री पर 27 करोड़ रुपये से अधिक की लंबी अवधि की पूंजीगत लाभ की छूट है। जिसके बाद हमने जांच में पाया कि इन शेयरों की खरीद असल में हुई नहीं थी…क्योंकि समूह के निदेशकों ने नाममात्र मूल्य पर ही शेयर खरीदे थे।

आयकर विभाग के अनुसार कांग्रेस विधायक निलय डागा और उनके भाई कोलकाता में 24 कंपनियों से फर्जी लेनदेन का कोरोबार कर रहे थे। जिसका मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी करना था।