पेट्रोल के बढ़े हुए दामों पर बोले कुमार विश्वास- ‘मीडिया फूफाओं का योगदान कभी न भूलना बेटा’

National

नई दिल्ली : पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने जहां आम लोगों के लिए सिर में दर्द पैदा कर दिया है तो वहीं विरोधी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। जबकि इस मसले पर एक बार फिर से कवि कुमार विश्वास ने तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट किया है -‘प्रिय पेट्रोल ! दो दिन की सड़क-यात्रा के दौरान तुम्हारी राष्ट्रीय प्रगति का पता चला, योग्य अभिभावक हों तो तुम जैसे बालक एक्ट ऑफ गॉड हो ही जाते हैं! तुम्हारी बेशर्म बढ़ोतरी को न्यायसंगत ठहराते अपने मीडिया फूफाओं का योगदान कभी न भूलना बेटा, तुम्हारा वैसे ये पहली बार नहीं है जब अपने अंदाज में विश्वास ने सरकार को घेरा हो, इससे पहले उन्होंने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि, ईश्वरीय कृपा बोले तो एक्ट ऑफ गॉड।’

‘ईश्वरीय कृपा अर्थात ऐक्ट ऑफ गॉड’
मालूम हो कि इससे पहले भी कवि कुमार विश्वास ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर पर तंज कसा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेल के बढ़े दामों का सरकार से क्या लेना-देना। विश्वास ने ट्विटर पर वित्तमंत्री के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, ‘ईश्वरीय कृपा अर्थात ऐक्ट ऑफ गॉड।’ कवि कुमार विश्वास का ये ट्वीट उस वक्त भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।

आपको बता दें कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आज दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 25 पैसे का इजाफा हुआ है, जिसके बाद पेट्रोल का दाम 90.83 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि वहीं डीजल 35 पैसे बढ़कर 81.32 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 97.34 रुपये प्रति लीटर है और डीजल का दाम 88.44 रु प्रति लीटर है। जबकि भोपाल में एक्सपी पेट्रोल 101.87 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

गौरतलब है कि तेल के बढ़ते हुए दामों पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी सफाई पेश की थी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ईंधन की कीमत बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला कारण है अंतर्राष्ट्रीय बाजार ने ईंधन का उत्पादन कम कर दिया है और दूसरा है अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए विनिर्माण देश कम ईंधन का उत्पादन कर रहे हैं।

इससे उपभोक्ता देश त्रस्त हैं। वहीं उन्होंने कहा कि हम लगातार सऊदी अरब ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और रूस समेत सहयोगी देशों (ओपेक प्लस) से आग्रह करते रहे हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें उम्मीद है कि बदलाव होगा।