भीड़ इकट्ठी कर लेने से कानून नहीं बदले जाते : कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

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नई दिल्ली : दिल्ली के बॉर्डर इलाकों में किसानों का आंदोलन 89 दिनों से जारी है। कृषि कानून को रद्द करने और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनाने की मांग पर किसान अड़े हुए हैं। इस मुद्दे पर किसान संगठनों और सरकार की 12 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन सभी की सभी बेनतीजा रही। ऐसे में अब एक बार फिर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से बात करने की अपील की है।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को दोहराया कि वो नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से बात करने के लिए तैयार हैं, साथ ही जारी किसान आंदोलन पर उन्होंने कहा कि सिर्फ भीड़ इकट्ठा करने से कानून रद्द नहीं होते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारी किसान संगठनों से आग्रह किया कि वे सरकार को बताएं कि इन नए कानूनों में किसान विरोधी कौन से प्रावधान हैं? उन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृषि मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार ने संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे पर विचार करते हुए किसान संगठनों के साथ 12 दौर की वार्ता की है। नए कानूनों में किसानों को यह बताना चाहिए कि किसान विरोधी क्या है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होता है कि भीड़ इकट्ठा होती है और कानून निरस्त हो जाते हैं।

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने खुद कहा है किसान यूनियनों को सरकार को बताना चाहिए कि किसानों के खिलाफ क्या प्रावधान हैं। सरकार इसे समझने और संशोधन करने के लिए तैयार है। अब, अगर आंदोलनकारी यूनियन किसानों के शुभचिंतक हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन से प्रावधान उनके लिए समस्याएं पैदा कर रहे हैं।