नीरव मोदी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, प्रत्यर्पण रोकने की लगाई गुहार

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लंदन : PNB घोटाले में वॉन्टेड हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ ब्रिटेन की हाईकोर्ट में अपील की है। उसने याचिका दायर कर कोर्ट के प्रत्यर्पण के फैसले और उसे UK गृह मंत्रालय की मंजूरी के फैसले को चैलेंज करने की इजाजत मांगी है। इससे पहले फरवरी में ब्रिटेन की वेस्टमिन्सटर कोर्ट में नीरव के प्रत्यर्पण पर आखिरी सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने नीरव को भारत भेजने की मंजूरी दे दी थी। इसके बाद 16 अप्रैल को ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने भी नीरव को भारत को सौंपने को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद उसका भारत आना तय हो गया था।

जज सेमुअल गूजी ने कहा था कि नीरव मोदी को भारत में चल रहे केस में जवाब देना होगा। उन्होंने माना कि नीरव मोदी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। 2 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला आया था। नीरव मोदी पर PNB से लोन लेकर करीब 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। घोटाला सामने आने के बाद वह जनवरी 2018 में देश छोड़कर फरार हो गया था।

जज ने कहा कि नीरव मोदी को भारत भेजा जाता है तो ऐसा नहीं है कि उन्हें वहां इंसाफ न मिले। कोर्ट ने नीरव मोदी की मानसिक स्थिति ठीक न होने की दलील भी खारिज कर दी है। कहा कि ऐसा नहीं लगता उन्हें ऐसी कोई परेशानी है। कोर्ट ने मुंबई की ऑर्थर रोड जेल की बैरक नंबर-12 को नीरव के लिए फिट बताया। 19 मार्च, 2019 को गिरफ्तार किए गए नीरव मोदी पर मनी लॉन्ड्रिंग, सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को डराने की साजिश रचने का आरोप है।

अब क्या होगा?

  • भारतीय जांच एजेंसियों को कोर्ट में साबित करना होगा कि नीरव पर लगे आरोप ब्रिटेन के कानून के तहत भी अपराध हैं।
  • अगर आरोप साबित होते हैं तो हाईकोर्ट नीरव के प्रत्यर्पण का ऑर्डर दे सकता है।
  • हाईकोर्ट यह भी देखेगा कि क्या नीरव के प्रत्यर्पण से ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन तो नहीं होगा।
  • ऐसे में नीरव को भारत लाने में भारतीय एजेंसियों को कम से कम 10 से 12 महीने का वक्त लग सकता है।