क्वाड की नजदीकी ने बढ़ाई ड्रैगन की बैचेनी, 9 अप्रैल को 11वीं मिलिट्री टॉक

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच 11वें दौर की मिलिट्री टॉक (सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता) 9 अप्रैल को होने की संभावना है। मई 2020 से दोनों देशों के बीच सीमा पर शुरू हुए तनाव को हल करने के लिए इससे पहले 10 बार मिलिट्री टॉक हो चुकी है।

9वें दौर की बातचीत के बाद पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से दोनों देश की सेनाएं पीछे हट चुकी हैं। अब 11वें दौर की बातचीत के लिए अभी चीन के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। भारत और चीन के बीच 11वें दौर की बातचीत ऐसे समय होने की संभावना है, जब 12 मार्च को हुए क्वाड देशों के पहले शिखर सम्‍मेलन को लेकर चीन की बढ़ती बेचैनी साफ नजर आ रही है।

हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेप्सांग पर रहेगा फोकस
दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडर-रैंक के अधिकारियों के बीच 10वें दौर की बातचीत 20 फरवरी को हुई थी। करीब 16 घंटे चली इस बैठक में पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेप्सांग जैसे गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी छोर की तरह इन विवादित इलाकों से भी सैनिकों, हथियारों तथा अन्य सैन्य उपकरणों को हटाए जाने पर गहन मंथन किया गया। दोनों देशों के बीच हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेप्सांग समेत अन्य टकराव वाले मुद्दों को लेकर 11वें दौर की बातचीत 9 अप्रैल को हो सकती है। भारत की ओर से यह तारीख फाइनल करके चीन को भेजी गई है, लेकिन अभी तक चीन का कोई जवाब नहीं आया है।

10वें दौर की बातचीत में भी हुईं कई जरूरी बातचीत
चीन के साथ 10वें दौर की बातचीत मोल्डो-चुशुल सीमा मीटिंग प्वाइंट पर शुरू हुई थी। इससे दो दिन पहले दोनों सेनाएं ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से हथियार और सैनिक वापस बुला लिए थे। बैठक का मुख्य मुद्दा रक्षा मंत्री ने 11 फरवरी को संसद के दोनों सदनों में बयान देते वक्त ही तय कर दिया था।

इसके मुताबिक पैन्गोंग झील के उत्तरी और दक्षिण किनारों पर पूरी तरह डिसइंगेजमेंट होने के 48 घंटे के भीतर बाकी विवादित इलाकों पर भी चीन से बातचीत की जाएगी। इसलिए 16 घंटे की इस वार्ता में LAC के अन्य विवादित क्षेत्रों हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा, डेप्सांग और डेमचोक में गतिरोध खत्म करने पर ही फोकस किया गया। अब अगली वार्ता में भी इन्हीं इलाकों से डिसइंगेजमेंट होने पर ध्यान केन्द्रित किया जाना है।