नक्सली हमले के बाद उठे सवाल, क्या जल्दबाजी में लॉन्च कर दिया ऑपरेशन?

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hindustan1st news: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 3 अप्रैल को हुए नक्सली हमले में 23 जवान शहीद हो गए। इस हमले ने टॉप लेवल पर बैठे अफसरों की स्ट्रैटजी और ऑपरेशन की वजह पर सवाल उठा दिए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या हमला टाला जा सकता था? क्या प्लानिंग जल्दबाजी में हुई और आनन-फानन में ऑपरेशन लॉन्च कर दिया गया? क्या स्ट्रैटजी कमजोर थी और अफसरों ने कुछ तूफानी करने के लिहाज से एडवेंचर में ये ऑपरेशन किया?

ऑपरेशन पर उठे 5 सवाल

1. नक्सली चला रहे हैं काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन, इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया?
7 साल से सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार अभी एक पखवाड़े से छत्तीसगढ़ में ही मौजूद हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि जहां ऑपरेशन प्लान किया गया, वहां नक्सलियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी हमेशा रहती है। इसके अलावा नक्सली TCOC (टेक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन) चला रहे हैं। यानी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन करने पर पलटवार। इसे ध्यान में क्यों नहीं रखा गया?

2. मौजूदा मौसम नक्सलियों के खिलाफ, इस वक्त वो एक्स्ट्रा अलर्ट रहते हैं, इस पर गौर क्यों नहीं किया?
इस वक्त जो मौसम है, उसमें पेड़ों की पत्तियां झड़ जाती हैं। जंगलों में विजिबिलिटी का दायरा बढ़ जाता है। पानी के ठिकाने घट जाते हैं और ऐसे में नक्सली अपने दुर्गम सुरक्षित ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकते। इसलिए वो TCOC चलाते हैं। TCOC के तहत वे अतिरिक्त सतर्कता बरतते हैं। उन्हें पता रहता है कि इन हालात में सुरक्षा बल ऑपरेशन कर सकते हैं। होता भी यही है। सुरक्षा बल अपने ऑपरेशंस बढ़ा देते हैं, लेकिन नक्सलियों की अलर्टनेस का भी खास ध्यान रखते हैं। उसी हिसाब से ऑपरेशनल प्लानिंग करते हैं ताकि वो डॉमिनेट कर सकें। बीजापुर में हुए ऑपरेशन में शायद इसे दरकिनार किया गया?

3. सूचना लंबे समय से थी, फिर अचानक इस तरह का ऑपरेशन प्लान क्यों किया?
यह पूरी तरह से समझ से बाहर है कि बीजापुर के तर्रेम में नक्सलवादियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा सलाहकार को वहां भेज दिया गया। उन्होंने लगातार कैंप करके ऑपरेशन प्लान किया और उसे सुपरवाइज किया, जबकि नक्सलवादियों के बारे में सूचना लंबे समय से रही होगी। ऐसा तो नहीं कि सुरक्षा सलाहकार को ये लगा कि लंबे समय से पोस्ट पर हूं और कुछ बड़ा नहीं कर पाया। लिहाजा एडवेंचर या कुछ तूफानी करने के इरादे से उन्होंने ऑपरेशन की प्लानिंग की?

4. नक्सलियों की अलर्टनेस को ध्यान में रखकर बैकअप प्लानिंग क्यों नहीं की?
नक्सली हमले से साफ जाहिर है कि सुरक्षा बलों को जाल में फंसाया गया। सुरक्षा सलाहकार और सुरक्षा बलों के आला अधिकारी लंबे समय से उसी इलाके में थे। नक्सलियों का सूचना तंत्र देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि उन्हें इस ऑपरेशन की जानकारी पहले से ही थी। इन हालात में ऑपरेशन के दौरान होने वाले नुकसान को पूरी तरह कभी नहीं टाला जा सकता। हैरान करने वाली बात ये है कि ऑपरेशन प्लान करते वक्त टॉप लेवल के अधिकारियों को इस बात का ख्याल नहीं रहा। उन्होंने ये क्यों नहीं सोचा कि मुठभेड़ के दौरान नुकसान की स्थिति में बैकअप प्लान क्या होगा?
4 घंटे तक नक्सलियों ने गोलीबारी की। एंबुश में फंसे जवानों को आखिरी पल तक मदद नहीं मिल पाई। प्लानिंग के दौरान इसका ध्यान क्यों नहीं रखा गया? हालात ये थे कि मुठभेड़ के 24 घंटे बाद भी रेस्क्यू और मेडिकल टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। शहीदों के शव ट्रैक करने के लिए एयरफोर्स की मदद लेनी पड़ी।

5. इस इलाके में 10 साल में 300 शहीद हुए, सबक क्यों नहीं लिया?
बीजापुर के जिस इलाके में मुठभेड़ हुई, उसके 25 किलोमीटर के दायरे में 10 साल में 300 जवान शहीद हुए हैं। 2010 में इस इलाके के करीब ही 76 जवान शहीद हुए थे। 2020 में जिस जगह पुलिस के 17 जवान शहीद हुए, वह जगह भी करीब है। अफसरों और सरकार दोनों ने अतीत से सबक क्यों नहीं लिया? सुरक्षा सलाहकार का काम लॉन्ग टर्म स्ट्रैटजी बनाना और एजेंसियों के बीच कॉर्डिनेशन करना है। ऐसे ऑपरेशन प्लान करना नहीं, जिनकी भनक नक्सलियों को पहले से लग जाए। अब शहादत से प्लानिंग में हुई नाकामी को छिपाया जा रहा है।