स्मॉग बना आफत: कोरोना को हरा चुके लोगों को सांस लेने में आ रही दिक्कत

Rohtak

hindustan1st news, रोहतक : मॉग के कारण पोस्ट कोविड मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। उन पोस्ट कोविड मरीजों को ज्यादा परेशानी है, जिन्हें पहले से अस्थमा, कार्डियक व सांस संबंधी दिक्कतें हैं। दरअसल, पीजीआई में हर शनिवार कोपल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन डिपार्टमेंट की ओर से पोस्ट कोविड ओपीडी का संचालन होता है। ओपीडी में इस शनिवार को रोहतक, झज्जर, जींद, भिवानी सहित आसपास के जिलों से पोस्ट कोविड मरीज इलाज कराने के लिए 52 मरीज पहुंचे।

इनमें 60 फीसदी मरीज 40 से 65 साल की उम्र के थे। चिकित्सकों ने बताया कि 52 मरीजों में से 50% मरीजों ने सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश, सूखी खांसी, 30% मरीजों में फेफड़े में सिकुड़न आने से सांस फूलने व 20% मरीजों ने कमजोरी आने, थकान होने, भूख न लगने की समस्याएं बताईं। रोहतक पीजीआई की पोस्ट कोविड ओपीडी में एक माह में 122 पोस्ट कोविड मरीज इलाज कराने पहुंच चुके हैं।

60% मरीजों ने ऐसे ही लक्षण बताए। कोविड-19 के स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह में अस्थमा और कार्डियक मरीजों के लिए खतरे वाले हैं। प्रदूषण से भी अब खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में कोविड से रिकवर हो चुके मरीजों व बुजुर्गों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।

10 दिन से बढ़ी परेशानी

पानीपत के 40 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि उसे कोरोना हुए एक माह बीत चुका है। अब 10 दिन से सांस फूलने व सांस लेने में दिक्कत आ रही है। चिकित्सकों से सलाह लेने पर स्मॉग का दुष्प्रभाव होने का पता चला। वहीं, रोहतक के 60 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि उन्हें डेढ़ माह पहले कोरोना संक्रमण हुआ था। पिछले एक सप्ताह से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश, सूखी खांसी की परेशानी है।