75 साल में पहली बार नहीं होगा विंबलडन टूर्नामेंट

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खेल-जगत : कोरोना का कहर नहीं होता तो आज हम टेनिस के सबसे बड़े टूर्नामेंट विंबलडन के 134वें सीजन को शुरू होता देखते। लेकिन, खेल प्रेमियों के लिए 1 अप्रैल को यह बुरी खबर आई थी कि इस साल विंबलडन नहीं होगा। दूसरे विश्व युद्ध के 75 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि टूर्नामेंट को रद्द करना पड़ा। अब ग्रास कोर्ट का यह टूर्नामेंट अगले साल 28 जून से 11 जुलाई तक होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टूर्नामेंट के रद्द होने से ऑर्गनाइजर्स को लगभग 2400 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। लेकिन, समझदारी यह रही कि ऑल इंग्लैंड क्लब ने 2003 में सार्स महामारी के बाद अपनी बीमा पॉलिसी को अपडेट कर लिया था। इस लिहाज से ऑर्गनाइजर्स को बीमा के तौर पर करीब 950 करोड़ रुपए मिले हैं। ऐसे में अब यह नुकसान करीब 1450 करोड़ रुपए का ही रहेगा।

बीमा कंपनी को हर साल 15 करोड़ रु. देते हैं ऑर्गनाइजर्स
ऑर्गनाइजर्स बतौर बीमा हर साल इंश्योरेंस कंपनी को करीब 15 करोड़ रुपए देते आए हैं। विंबलडन के चीफ एक्जीक्यूटिव रिचर्ड लेविस ने कहा था, ‘‘हम भाग्यशाली हैं कि टूर्नामेंट का बीमा है। इससे काफी मदद मिलेगी। आयोजन में शामिल सभी लोग अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन, अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।’’

पहला विंबलडन 1877 में खेला गया था। इसे रॉयल टेनिस चैम्पियनशिप के नाम से भी जाना जाता था। पहली बार टूर्नामेंट को पहले विश्व युद्ध के कारण 1915 से 1918 तक रद्द करना पड़ा था। इसके बाद दूसरी बार चैम्पियनशिप 1940 से 1945 तक नहीं हो सकी थी। तब दूसरा विश्व युद्ध कारण बना था। इसके बाद अब 2020 में तीसरी बार कोरोनावायरस के कारण विंबलडन को रद्द करना पड़ा है।

ऑर्गनाइजर्स ने टूर्नामेंट को टालना बेहतर नहीं समझा
उम्मीद की जा रही थी कि कोरोना के कारण विंबवलडन को खाली स्टेडियम में कराया जा सकता है, लेकिन ऑर्गनाइजर्स ने पहले ही इनकार कर दिया था। वहीं, 3 बार के चैम्पियन बोरिस बेकर ने ऑर्गनाइजर्स से इंतजार करने की अपील भी की थी। लेकिन ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब ने टूर्नामेंट को टालना बेहतर नहीं समझा। उसने बोर्ड मीटिंग के बाद टूर्नामेंट को रद्द करने का फैसला किया।

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