यमुनानगर : बिना लाइसेंस चल रही थी ग्लू फैक्ट्रियां, सीएम फ्लाइंग ने मारा छापा

Yamuna Nagar

hindustan1st news, यमुनानगर : बाडी माजरा में सीएम फ्लाइंग की टीम ने बिना लाइसेंस चल रही ग्लू बनाने की 2 फैक्ट्रियां पकड़ी। टीम देर शाम बाडी माजरा स्थित गुड्डू केमिकल और मिराज केमिकल नाम से चल रही दो फैक्ट्रियों में पहुंची। टीम के पास पहले से ही सूचना थी कि यह फैक्ट्रियां अवैध तरीके से चल रही हैं। टीम ने जब वहां रेड की तो वहां काफी मात्रा में यूरिया और ग्लू मिला।

हालांकि जो यूरिया मिला है, वह टेक्निकल यूरिया की पैकिंग में था इसलिए अभी यह क्लियर नहीं है कि यहां बनने वाला ग्लू कृषि में इस्तेमाल होने वाली यूरिया से बनाया जा रहा था। इसकी पुष्टि के लिए टीम ने यूरिया और ग्लू के सैंपल लिए हैं। इस रेड से प्लाईवुड और ग्लू फैक्ट्रियों में हड़कंप मचा रहा। यह रेड सीएम फ्लाइंग की टीम के सब इंस्पेक्टर अनीश कुमार और सब इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के नेतृत्व में की। टीम के साथ प्रदूषण नियंत्रण विभाग, फायर ऑफिसर और कृषि विभाग के अधिकारी थे।

देर रात तक टीम सैंपल लेने में लगी थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि दोनों फैक्ट्रियों के मालिक लाइसेंस नहीं दिखा पाए। लाइसेंस के नाम पर वे और दस्तावेज दिखाते रहे। देर रात तक टीम मौके पर ही थी। खबर लिखे जाने तक टीम के सामने कोई लाइसेंस पेश नहीं किया जा सका। उधर, बाडी माजरा और पांसरा एरिया की कई प्लाईवुड और ग्लू बनाने की फैक्ट्री टीम के आने की सूचना पर बंद हो गई। कइयों ने लेबर अंदर ही रख कर बाहर से गेट ताला लगा दिया। यहां पर आने से पहले टीम छछरौली रोड स्थित एक फैक्ट्री में गई थी, लेकिन वह फैक्ट्री बंद मिली।

यमुनानगर प्लाईवुड का हब, यहां दिन सैकड़ों क्विंटल यूरिया खपता है

यमुनानगर और जगाधरी प्लाईवुड का हब है। प्लाईवुड बनाने में बड़ी मात्रा में यूरिया से बनने वाला ग्लू केमिकल यूज़ होता है। यह प्लाई की परतें चिपकाने में इस्तेमाल होता है। कृषि यूरिया सब्सिडी पर होने से सस्ता मिलता है लेकिन कृषि में इस्तेमाल होने वाला यूरिया फैक्ट्री में यूज नहीं हो सकता। फैक्ट्री में ग्लू बनाने के लिए टेक्निकल यूरिया इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग पैसे बचाने के चलते टेक्निकल यूरिया की जगह सेटिंग कर कृषि यूरिया खरीदकर उससे ग्लू बनाते हैं। कई कृषि यूरिया को फैक्ट्री वालों को बेचने वाले और कृषि यूरिया से ग्लू बनाने वाले पहले भी फंस चुके हैं। अधिकारियों की सख्त कार्रवाई न होने से यह धंधा नहीं रुक रहा। जिले में बिना लाइसेंस अवैध तरीके से कई इस तरह की फैक्ट्रियां चल रही हैं।